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A Sacred Bond of Care, Compassion, and Cow Protection - Dava Devi Foundation
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By Admin

21 Oct, 2025

गौ सम्मान आह्वान अभियान – अब भावनाओं से बढ़कर संकल्प की बारी है!

भारत में गौमाता केवल एक पशु नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत की जीवित धरोहर हैं। सदियों से गौ-सेवा को धर्म, कर्तव्य और राष्ट्र निर्माण का आधार माना गया है। लेकिन दुखद सत्य यह है कि आज भी देश के कई हिस्सों में गौमाता या तो बेसहारा भटक रही हैं, दुर्घटनाओं का शिकार हो रही हैं, या अवैध तस्करी और हिंसा जैसी अमानवीय परिस्थितियों से गुजर रही हैं।

ऐसे समय में गौ सम्मान आह्वान अभियान एक सशक्त आवाज़ बनकर उभर रहा है, जो भावनाओं से आगे बढ़कर कानूनी और सामाजिक स्तर पर ठोस बदलाव की मांग करता है। यह अभियान केवल आक्रोश नहीं—एक राष्ट्रीय संकल्प है कि भारत में गौ-रक्षा केवल परंपरा का हिस्सा न रहे, बल्कि मजबूत कानून और व्यवस्था का भी आधार बने।

गौरक्षा का कानूनी पक्ष—क्यों है यह आवश्यक?

भारत का संविधान जनवरों के प्रति करुणा को नागरिकों का कर्तव्य बताता है, लेकिन गौ-रक्षा के लिए आज भी एक सर्वमान्य केंद्रीय कानून नहीं है। राज्यों के अलग-अलग कानून, व्यवस्था की कमी और कमजोर दंड व्यवस्था के कारण अवैध गौ-तस्करी और अत्याचार रुक नहीं पा रहे।
इसीलिए अभियान तीन मुख्य कानूनी मांगें करता है—

1. गौ माता को “राष्ट्र माता” का संवैधानिक दर्जा मिले

यह दर्जा न केवल सांस्कृतिक सम्मान है, बल्कि इससे गौमाता को वही सुरक्षा मिलेगी जो किसी राष्ट्रीय प्रतीक को मिलती है। इससे गौ-हत्या, तस्करी और अत्याचार के खिलाफ कड़े प्रावधान लागू किए जा सकेंगे।


2. गौ-रक्षा हेतु केंद्रीय स्तर पर मजबूत कानून बने

जब तक केंद्र स्तर पर एकसमान, कठोर और लागू करने योग्य कानून नहीं बनता, तब तक गौ-रक्षा केवल काग़ज़ों में ही रह जाएगी।
ऐसा कानून —

  • तस्करी पर सख़्त सज़ा,

  • गौ-चिकित्सा के लिए अनिवार्य व्यवस्था,

  • सड़क दुर्घटनाओं में घायल गायों के लिए आपातकालीन राहत —
    जैसे प्रावधान अनिवार्य कर सकता है।


3. भारत में गौ-हत्या पर पूर्ण और स्पष्ट प्रतिबंध

कई राज्यों में गौ-हत्या पर आंशिक या अस्पष्ट कानून हैं, जिसमें छूट और बहाने बहुत हैं।
अभियान मांग करता है कि पूरे भारत में गौ-हत्या पूर्ण रूप से प्रतिबंधित हो, ताकि गौ-संरक्षण वास्तव में प्रभावी हो सके।


अभियान क्यों ज़रूरी है?

  • क्योंकि गौ-संरक्षण भावनाओं का नहीं, जीवन और कानून का विषय है।

  • क्योंकि सड़कों पर मरती-तड़पती गायें हमारी मानवीय चूक का आईना हैं।

  • क्योंकि गौ-रक्षा को मजबूत कानूनी ढांचा मिलने से ही देश में वास्तविक परिवर्तन आएगा।

  • क्योंकि करोड़ों भारतीयों का यह आस्था का प्रश्न है, जो अब कर्तव्य में बदल चुका है


निष्कर्ष

गौ सम्मान आह्वान अभियान भारत की आत्मा की पुकार है।
यह केवल सोशल मीडिया ट्रेंड या जनभावना का उभार नहीं—यह एक ऐतिहासिक माँग है, जो राष्ट्र के सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक ढांचे को सुदृढ़ करेगी।

जब तक गौ-रक्षा कानून मजबूत नहीं होंगे, तब तक किसी भी आंदोलन या भावना का वास्तविक परिणाम नहीं निकल सकेगा।

अब समय है—
भावनाओं से आगे बढ़कर संकल्प का।
आवाज़ उठाने का।
और मिलकर देश में गौ-संरक्षण की मजबूत कानूनी नींव रखने का।